शान्ति पर्व  अध्याय २२३

वासुदेव उवाच

वेदश्रुतिभिराख्यानैरर्थानभिजिगीषते |  ११   क
तितिक्षुरनवज्ञश्च तस्मात्सर्वत्र पूजितः ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति