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शान्ति पर्व
अध्याय २२३
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वासुदेव उवाच
असक्तः सर्वसङ्गेषु सक्तात्मेव च लक्ष्यते |  १६   क
अदीर्घसंशय़ो वाग्मी तस्मात्सर्वत्र पूजितः ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति