शान्ति पर्व  अध्याय २२३

वासुदेव उवाच

कुकुराधिप यान्मन्ये शृणु तान्मे विवक्षतः |  ४   क
नारदस्य गुणान्साधून्सङ्क्षेपेण नराधिप ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति