शान्ति पर्व  अध्याय २२३

वासुदेव उवाच

तेजसा यशसा वुद्ध्या नय़ेन विनय़ेन च |  ८   क
जन्मना तपसा वृद्धस्तस्मात्सर्वत्र पूजितः ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति