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आदि पर्व
अध्याय १५८
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अर्जुन उवाच
विभीषिकैषा गन्धर्व नास्त्रज्ञेषु प्रय़ुज्यते |  २४   क
अस्त्रज्ञेषु प्रय़ुक्तैषा फेनवत्प्रविलीय़ते ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति