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शान्ति पर्व
अध्याय २२४
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भीष्म उवाच
आकाशात्तु विकुर्वाणात्सर्वगन्धवहः शुचिः |  ३६   क
वलवाञ्जाय़ते वाय़ुस्तस्य स्पर्शो गुणो मतः ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति