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शान्ति पर्व
अध्याय २२४
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भीष्म उवाच
हिंस्राहिंस्रे मृदुक्रूरे धर्माधर्मे ऋतानृते |  ४८   क
अतो यन्मन्यते धाता तस्मात्तत्तस्य रोचते ||  ४८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति