शान्ति पर्व  अध्याय २२४

भीष्म उवाच

कर्मजोऽय़ं पृथग्भावो द्वन्द्वय़ुक्तो विय़ोगिनः |  ५९   क
आत्मसिद्धिस्तु विज्ञाता जहाति प्राय़शो वलम् ||  ५९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति