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शान्ति पर्व
अध्याय १७३
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भीष्म उवाच
ये केचन स्वध्ययनाः प्राप्ता यजनय़ाजनम् |  ४२   क
कथं ते जातु शोचेय़ुर्ध्याय़ेय़ुर्वाप्यशोभनम् ||  ४२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति