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शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
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भीष्म उवाच
वर्तसे मोक्षधर्मेषु गार्हस्थ्ये त्वहमाश्रमे |  ६०   क
अय़ं चापि सुकष्टस्ते द्वितीय़ोऽऽश्रमसङ्करः ||  ६०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति