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शान्ति पर्व
अध्याय २२५
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व्यास उवाच
वाय़ोरपि गुणं स्पर्शमाकाशं ग्रसते यदा |  ९   क
प्रशाम्यति तदा वाय़ुः खं तु तिष्ठति नानदत् ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति