menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २२५
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
न पापकं ध्यास्यति धर्मपुत्रो; धनञ्जय़श्चाप्यनुवर्तते तम् |  १८   क
अरण्यवासेन विवर्धते तु; भीमस्य कोपोऽग्निरिवानिलेन ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति