menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २२५
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
गतो ह्यरण्यादपि शक्रलोकं; धनञ्जय़ः पश्यत वीर्यमस्य |  २८   क
अस्त्राणि दिव्यानि चतुर्विधानि; ज्ञात्वा पुनर्लोकमिमं प्रपन्नः ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति