menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २२५
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
निशम्य तद्वचनं पार्थिवस्य; दुर्योधनो रहिते सौवलश्च |  ३१   क
अवोधय़त्कर्णमुपेत्य सर्वं; स चाप्यहृष्टोऽभवदल्पचेताः ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति