शान्ति पर्व  अध्याय २२६

व्यास उवाच

निमी राष्ट्रं च वैदेहो जामदग्न्यो वसुन्धराम् |  २६   क
व्राह्मणेभ्यो ददौ चापि गय़श्चोर्वीं सपत्तनाम् ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति