शान्ति पर्व  अध्याय २२६

व्यास उवाच

करन्धमस्य पुत्रस्तु मरुत्तो नृपतिस्तथा |  २८   क
कन्यामङ्गिरसे दत्त्वा दिवमाशु जगाम ह ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति