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शान्ति पर्व
अध्याय २२६
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व्यास उवाच
व्रह्मदत्तश्च पाञ्चाल्यो राजा वुद्धिमतां वरः |  २९   क
निधिं शङ्खं द्विजाग्र्येभ्यो दत्त्वा लोकानवाप्तवान् ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति