उद्योग पर्व  अध्याय १०९

सुपर्ण उवाच

उद्यतोऽहं द्विजश्रेष्ठ तव दर्शय़ितुं दिशः |  २६   क
पृथिवीं चाखिलां व्रह्मंस्तस्मादारोह मां द्विज ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति