वन पर्व  अध्याय २२६

वैशम्पाय़न उवाच

वन्द्यमानो द्विजै राजन्पूज्यमानश्च राजभिः |  ९   क
पौरुषाद्दिवि देवेषु भ्राजसे रश्मिवानिव ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति