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शान्ति पर्व
अध्याय २२८
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व्यास उवाच
समः सर्वेषु भूतेषु व्रह्माणमभिवर्तते |  ३५   क
नैवेच्छति न चानिच्छो यात्रामात्रव्यवस्थितः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति