उद्योग पर्व  अध्याय १९०

भीष्म उवाच

ततो द्रुपदमासाद्य दूतः काञ्चनवर्मणः |  २०   क
एक एकान्तमुत्सार्य रहो वचनमव्रवीत् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति