शान्ति पर्व  अध्याय २२९

व्यास उवाच

धर्मद्वय़ं हि यो वेद स सर्वः सर्वधर्मविद् |  २१   क
स त्यागी सत्यसङ्कल्पः स तु क्षान्तः स ईश्वरः ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति