वन पर्व  अध्याय २२९

वैशम्पाय़न उवाच

राजा दुर्योधनो नाम धृतराष्ट्रसुतो वली |  २४   क
विजिहीर्षुरिहाय़ाति तदर्थमपसर्पत ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति