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वन पर्व
अध्याय २२९
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वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श स तदा गावः शतशोऽथ सहस्रशः |  ४   क
अङ्कैर्लक्षैश्च ताः सर्वा लक्षय़ामास पार्थिवः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति