आदि पर्व  अध्याय २३

सूत उवाच

विचित्रफलपुष्पाभिर्वनराजिभिरावृतम् |  २   क
भवनैरावृतं रम्यैस्तथा पद्माकरैरपि ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति