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स्त्री पर्व
अध्याय २३
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गान्धार्यु उवाच
यस्य रुक्ममय़ी माला शिरस्येषा विराजते |  ११   क
श्वापदैर्भक्ष्यमाणस्य शोभय़न्तीव मूर्धजान् ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति