menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
अनुशासन पर्व
अध्याय ११७
chevron_left
chevron_right
युधिष्ठिर उवाच
सर्वं तत्त्वेन धर्मज्ञ यथावदिह धर्मतः |  ५   क
किं वा भक्ष्यमभक्ष्यं वा सर्वमेतद्वदस्व मे ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति