अनुशासन पर्व  अध्याय २३

भीष्म उवाच

आदिष्टिनो ये राजेन्द्र व्राह्मणा वेदपारगाः |  १७   क
भुञ्जते व्रह्मकामाय़ व्रतलुप्ता भवन्ति ते ||  १७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति