अनुशासन पर्व  अध्याय २३

भीष्म उवाच

व्राह्मणा भरतश्रेष्ठ सततं व्रह्मवादिनः |  ७   क
मार्कण्डेय़ः पुरा प्राह इह लोकेषु वुद्धिमान् ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति