स्त्री पर्व  अध्याय २१

गान्धार्यु उवाच

शार्दूलमिव सिंहेन समरे सव्यसाचिना |  ५   क
मातङ्गमिव मत्तेन मातङ्गेन निपातितम् ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति