आश्रमवासिक पर्व  अध्याय २३

कुन्त्यु उवाच

श्वश्रूश्वशुरय़ोः कृत्वा शुश्रूषां वनवासिनोः |  २०   क
तपसा शोषय़िष्यामि युधिष्ठिर कलेवरम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति