आश्रमवासिक पर्व  अध्याय २३

कुन्त्यु उवाच

निवर्तस्व कुरुश्रेष्ठ भीमसेनादिभिः सह |  २१   क
धर्मे ते धीय़तां वुद्धिर्मनस्ते महदस्तु च ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति