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विराट पर्व
अध्याय २३
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वैशम्पाय़न उवाच
गच्छ सैरन्ध्रि भद्रं ते यथाकामं चरावले |  ९   क
विभेति राजा सुश्रोणि गन्धर्वेभ्यः पराभवात् ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति