द्रोण पर्व  अध्याय २३

धृतराष्ट्र उवाच

पृथिवी भूय़सी तात मम पार्थस्य नो तथा |  ८   क
इति मामव्रवीत्सूत मन्दो दुर्योधनस्तदा ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति