menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
कर्ण पर्व
अध्याय २३
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
यथा ह्यभ्यधिकं कर्णं गुणैस्तात धनञ्जय़ात् |  ४८   क
वासुदेवादपि त्वां च लोकोऽय़मिति मन्यते ||  ४८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति