स्त्री पर्व  अध्याय २२

गान्धार्यु उवाच

सिन्धुसौवीरभर्तारं दर्पपूर्णं मनस्विनम् |  ९   क
भक्षय़न्ति शिवा गृध्रा जनार्दन जय़द्रथम् ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति