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शल्य पर्व
अध्याय २३
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सञ्जय़ उवाच
क्षेममद्य करिष्यामि धर्मराजस्य माधव |  ४८   क
हत्वैतद्दुर्वलं सैन्यं धार्तराष्ट्रस्य पश्यतः ||  ४८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति