आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ८५

वैशम्पाय़न उवाच

ततः शिरांसि दीप्ताग्रैस्तेषां चिच्छेद पाण्डवः |  ५   क
क्षुरैर्गाण्डीवनिर्मुक्तैर्नातिय़त्नादिवार्जुनः ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति