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अनुशासन पर्व
अध्याय ९४
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पशुसख उवाच
यद्वै धर्मे परं नास्ति व्राह्मणास्तद्धनं विदुः |  ३४   क
विनय़ार्थं सुविद्वांसमुपासेय़ं यथातथम् ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति