वन पर्व  अध्याय २३१

वैशम्पाय़न उवाच

अधर्मो हि कृतस्तेन येनैतदुपशिक्षितम् |  २०   क
अनृशंसास्तु कौन्तेय़ास्तस्याध्यक्षान्व्रवीमि वः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति