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शान्ति पर्व
अध्याय २३२
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व्यास उवाच
समः सर्वेषु भूतेषु लव्धालव्धेन वर्तय़न् |  १२   क
धुतपाप्मा तु तेजस्वी लघ्वाहारो जितेन्द्रिय़ः |  १२   ख
कामक्रोधौ वशे कृत्वा निनीषेद्व्रह्मणः पदम् ||  १२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति