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शान्ति पर्व
अध्याय २३२
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व्यास उवाच
पञ्च ज्ञानेन सन्धाय़ मनसि स्थापय़ेद्यतिः |  १७   क
यदैतान्यवतिष्ठन्ते मनःषष्ठानि चात्मनि |  १७   ख
प्रसीदन्ति च संस्थाय़ तदा व्रह्म प्रकाशते ||  १७   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति