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शान्ति पर्व
अध्याय २३२
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व्यास उवाच
प्रतिभामुपसर्गांश्चाप्युपसङ्गृह्य योगतः |  २२   क
तांस्तत्त्वविदनादृत्य स्वात्मनैव निवर्तय़ेत् ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति