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वन पर्व
अध्याय २३२
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अर्जुन उवाच
यदि साम्ना न मोक्ष्यन्ति गन्धर्वा धृतराष्ट्रजान् |  २०   क
अद्य गन्धर्वराजस्य भूमिः पास्यति शोणितम् ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति