वन पर्व  अध्याय २३२

युधिष्ठिर उवाच

जानाति ह्येष दुर्वुद्धिरस्मानिह चिरोषितान् |  ४   क
स एष परिभूय़ास्मानकार्षीदिदमप्रिय़म् ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति