आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ८७

वैशम्पाय़न उवाच

घटान्पात्रीः कटाहानि कलशान्वर्धमानकान् |  ४   क
न हि किञ्चिदसौवर्णमपश्यंस्तत्र पार्थिवाः ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति