शान्ति पर्व  अध्याय २३४

भीष्म उवाच

शुचिर्दक्षो गुणोपेतो व्रूय़ादिषुरिवात्वरः |  २०   क
चक्षुषा गुरुमव्यग्रो निरीक्षेत जितेन्द्रिय़ः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति