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शान्ति पर्व
अध्याय २३४
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भीष्म उवाच
इति सर्वमनुज्ञाप्य निवेद्य गुरवे धनम् |  २४   क
कुर्यात्कृत्वा च तत्सर्वमाख्येय़ं गुरवे पुनः ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति