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शान्ति पर्व
अध्याय २३५
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व्यास उवाच
अतिथिस्त्विन्द्रलोकेशो देवलोकस्य चर्त्विजः |  १६   क
जामय़ोऽप्सरसां लोके वैश्वदेवे तु ज्ञातय़ः ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति