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शान्ति पर्व
अध्याय २३५
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व्यास उवाच
स्वर्गलोके गृहस्थानां प्रतिष्ठा निय़तात्मनाम् |  २६   क
व्रह्मणा विहिता श्रेणिरेषा यस्मात्प्रमुच्यते |  २६   ख
द्वितीय़ं क्रमशः प्राप्य स्वर्गलोके महीय़ते ||  २६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति